राह

दबे दबे से रख कदम कि शोर भी तनिक न हो
गुजार दे ये ज़िन्दगी कि दिल मलाल भी न हो

शिकस्त हो तो रुक जरा बना इसे मशाले- राह
मन की मंज़िलों में न जरा से पल कि देर हो

जुदा है राह राह से संभल के इस पे पांव रख
यूँ पांव रख कि राह की मुश्किलें भी ढेर हों

मुसाफिरों का दौर है, ये राह भी अनंत है
आस भी इसी से है कि इस सफर से खैर हो

रात के सन्नाटे

आज भी . .
रात के सन्नाटे अक्सर
दिल की दीवार चाक करते हैं
गूँजते रहते हैं रातों रात , बजते रहते हैं
कभी उस झील की बातें कभी उस नदी की बातें
मुझे अकेला पाकर खूब सुनाते हैं
अक्सर डराते हैं मुझे
रात के सन्नाटे
आज भी . .

Aaj bhi . .
Raat ke sannate Aksar
dil ki deewar chak karte he
goonjte rahte he rato rat, bajte rahte he
kabhi us jheel ki batein kabhi us nadi ki batein
mujhe akela pakar khoob sunate he
aksar darate he mujhe
raat ke sannate
aaj bhi . .

दिल की बस्ती

 दिल  की  बस्ती  में  गुमनाम  साज़  बजते  रहे  

हम  भी  खुद्दार   थे,  खुद  अपनी  सदा  सुनते  रहे 

अर्ज़   करते  न  बनी  कोई  तमन्ना,   ख़्वाहिश 

 बंद  होंठों  में  अल्फ़ाज  कई  घुटते  रहे

 नाज़   ये  है   कि  रहे  इश्क़  से  महफूज़  मगर 

 हाल  मत  पूछिए   अरमान   किधर  जलते  रहे  .. .. 

बदलता मौसम

रात के बेघर परिंदे सैरपर  निकलें  कहां 
बस्तियों में टिमटिमाते बल्ब हैं…    सोयें कहाँ  

        जंगलों की  दास्तानें अब किताबों में है  बस 

        कोयलों की गूँज को इस शहर में ढूंढे  कहाँ 

बत्तियों से जल रहे हैं जिस्म सारे  धुप में

 छाँव लेने सब्ज पेड़ों की  बशर जाये कहाँ    

       पनघटों पे भीड़ हे सर पर हैं खली  गगरियाँ 

           प्यास से प्यासी धरा को खोदने जाएँ कहाँ 

अंधेरी रात

रात के अंधेरे में

रूह के करीब आकर

मदभरी अदाओं से

डस न ले ये तनहाई

ख्वाब ख्वाब होते हे

ख्वाबों में भी रुसवा हूँ

प्यार के तसव्वुर में

खो न जाये बीनाई

arman.k

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